देहरादून
शहर की एक प्रमुख गैर-सरकारी संस्था The Jai Hind Trust इन दिनों CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के कथित दुरुपयोग और कर्मचारियों के शोषण को लेकर विवादों में घिरती नजर आ रही है। संस्था से जुड़े रहे पूर्व कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनके वेतन को बिना किसी वैध कारण के रोका गया, उन्हें गैरकानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया, और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
इन मामलों में मुख्य रूप से ट्रस्ट से जुड़ी कुछ प्रमुख हस्तियों के नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें श्रीमती सरिका पंच्छी, श्री वीनीत कुमार, श्री अतुल भोखंडी, पल्लवी चतुर्वेदी और अन्य का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन्होंने CSR फंड का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग किया।
इस संदर्भ में शिकायतकर्ता ने Azim Premji Foundation से भी संपर्क किया, जो कि पूर्व में ट्रस्ट की साझेदार संस्था रही है। जब उनसे इस विषय में प्रतिक्रिया मांगी गई, तो फाउंडेशन की प्रतिनिधि भारती दीवान ने “नीतिगत गोपनीयता” का हवाला देते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे प्रकरण को लेकर डालनवाला थाना, देहरादून में भी एक लिखित शिकायत दर्ज करवाई है, जिसमें वेतन रोकने, नौकरी से अवैध निष्कासन, धमकी देने और CSR फंड के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। शिकायत दिए जाने के चार दिन बाद भी अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या प्राथमिक जांच की शुरुआत नहीं हुई है, जिससे पीड़ित पक्ष में निराशा है।
इस मुद्दे ने CSR गतिविधियों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि इस प्रकार की संस्थाएं सामाजिक कार्यों की आड़ में फंड का दुरुपयोग करती हैं, तो इससे न केवल जन-विश्वास को ठेस पहुँचती है, बल्कि जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचने की प्रक्रिया भी बाधित होती है।
अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन और CSR नियामक संस्थाएं इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती हैं और कब तक पीड़ितों को न्याय मिल पाता है।

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