देहरादून
आने वाले डेढ़ दशक में राजधानी देहरादून कैसी दिखेगी, शहर का विस्तार किस दिशा में होगा, हरित क्षेत्र कैसे संरक्षित रहेंगे, यातायात व्यवस्था कितनी आधुनिक होगी और बढ़ती आबादी की जरूरतों को किस प्रकार पूरा किया जाएगा, इन सभी सवालों का जवाब देहरादून महायोजना-2041 में छिपा है। इसी महत्वपूर्ण योजना को अधिक जनोन्मुखी और व्यवहारिक बनाने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने जनसुनवाई अभियान शुरू कर दिया है। सोमवार को सेक्टर-1 के लिए अजबपुर खुर्द स्थित शकुन स्पोर्ट्स एकेडमी में आयोजित पहले जनसुनवाई कैंप में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराईं।
जनसुनवाई कार्यक्रम में एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, सचिव मोहन सिंह बर्निया, संयुक्त सचिव गौरव चटवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। पहले दिन कुल 18 व्यक्तियों ने महायोजना-2041 के विभिन्न प्रावधानों को लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत कीं। अधिकारियों ने सभी बिंदुओं का विस्तार से परीक्षण करते हुए उनका अभिलेखीकरण किया तथा नियमानुसार आवश्यक संशोधन के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।
*शहर के भविष्य को आकार देने की कवायद*
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा देहरादून महायोजना-2041 केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की रूपरेखा है। तेजी से बढ़ती आबादी, अनियोजित निर्माण, ट्रैफिक दबाव, पर्यावरणीय चुनौतियां और आधारभूत सुविधाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए यह महायोजना तैयार की गई है। इसमें आवासीय क्षेत्रों के विस्तार, व्यावसायिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास, संस्थागत क्षेत्रों, हरित पट्टियों, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन और शहरी सुविधाओं के विकास से जुड़े व्यापक प्रावधान शामिल हैं। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का मानना है कि किसी भी महायोजना की सफलता तभी संभव है जब उसमें स्थानीय नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित हो। यही कारण है कि मसौदा तैयार होने के बाद अब आम लोगों, भू-स्वामियों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं को अपनी राय रखने का अवसर दिया जा रहा है।
*16 दिनों तक चलेगा संवाद का अभियान*
एमडीडीए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक शहर के 12 सेक्टरों में अलग-अलग स्थानों पर जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। प्रत्येक जनसुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। इस दौरान संबंधित सेक्टर के नागरिक अपनी आपत्तियां और सुझाव सीधे अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे। प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर के प्रत्येक हिस्से की स्थानीय आवश्यकताएं, समस्याएं और संभावनाएं महायोजना में समुचित रूप से शामिल हो सकें। जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर महायोजना में संशोधन भी किया जाएगा।
*विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती*
देहरादून जैसे संवेदनशील शहर के लिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। बढ़ते शहरीकरण के बीच हरित क्षेत्रों का संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और सुनियोजित निर्माण व्यवस्था को महायोजना का प्रमुख आधार बनाया गया है। ऐसे में जनसुनवाई से मिलने वाले सुझाव शहर की वास्तविक जरूरतों को समझने और योजना को जमीन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे। स्पष्ट है कि देहरादून महायोजना-2041 केवल कागजों पर तैयार की गई योजना नहीं होगी, बल्कि जनता की भागीदारी और सुझावों से विकसित एक ऐसा विजन दस्तावेज बनेगी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुव्यवस्थित, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल देहरादून की नींव रखेगा। जनसुनवाई का यह अभियान राजधानी के भविष्य को तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
*जनभागीदारी से बनेगी बेहतर राजधानी*
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 शहर के दीर्घकालिक विकास का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल सरकारी एजेंसियों की नहीं बल्कि पूरे शहर की योजना है, इसलिए नागरिकों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि लोगों के सुझावों से महायोजना और अधिक प्रभावी, व्यावहारिक तथा जनहितकारी बनेगी।
वहीं एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि जनसुनवाई प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है। प्रत्येक सेक्टर में अधिकारियों की टीम मौजूद रहेगी, जो प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का विधिवत अभिलेखीकरण करेगी। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि शहर के बेहतर भविष्य के निर्माण में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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