देहरादून: समाज कल्याण और सामुदायिक विकास के लिए उपयोग किए जाने वाले कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि The Jai Hind Trust ने इन निधियों का अनुचित रूप से व्यक्तिगत लाभ एवं अवैध उद्देश्यों के लिए उपयोग किया है, जो CSR अधिनियम, 2013 तथा अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है।
वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाएँ:
1. CSR फंड का अनधिकृत लेन-देन एवं डायवर्जन।
2. फर्जी परियोजनाओं के नाम पर वित्तीय दुरुपयोग।
3. लेखा-जोखा में हेरफेर एवं पारदर्शिता की कमी।
4. संभावित मनी लॉन्ड्रिंग एवं कर चोरी।
अनुरोधित कार्रवाई:
इस गंभीर वित्तीय कदाचार की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए, उत्तराखंड सरकार से निम्नलिखित कार्रवाइयों की मांग की जाती है:
1. संविधिक ऑडिट (Statutory Audit) की मांग:
• CSR नियम 2014 एवं कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 के तहत, सरकार The Jai Hind Trust के वित्तीय अभिलेखों की संविधिक ऑडिट कराए।
• ऑडिट में बैलेंस शीट, बैंक स्टेटमेंट, लाभ-हानि विवरण, CSR व्यय की वास्तविक स्थिति की गहन समीक्षा की जाए।
• यह ऑडिट सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संविधिक लेखा परीक्षकों (Statutory Auditors) से करवाया जाए।
2. फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) की मांग:
• धोखाधड़ी, वित्तीय कदाचार एवं गबन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट की भी आवश्यकता है।
• यह ऑडिट डिजिटल ट्रांजेक्शन, ईमेल रिकॉर्ड, संदिग्ध लेन-देन, फर्जी दस्तावेज एवं बैंक खातों की विस्तृत जांच करेगा।
• संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की स्थिति में प्रवर्तन निदेशालय (ED) एवं CBI को जांच सौंपने की सिफारिश की जाए।
3. दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई:
• धोखाधड़ी प्रमाणित होने पर दोषी व्यक्तियों एवं संगठनों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई (FIR, गिरफ्तारी, एवं संपत्ति जब्ती) की जाए।
निष्कर्ष:
CSR फंड का दुरुपयोग न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि यह सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों के विरुद्ध भी है। इस प्रकार की घटनाएँ समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में बाधा डालती हैं एवं सरकार की नीतियों को कमजोर करती हैं।
उत्तराखंड सरकार से अनुरोध है कि वह इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, संविधिक एवं फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश पारित करे एवं दोषियों के विरुद्ध आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

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